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परेतो विश्लेषण क्या है

परेतो विश्लेषण क्या है

परेतो विश्लेषण क्या है

सटीक और यथार्थवादी डेटा का उपयोग करके एक व्यवस्थित दृष्टिकोण के ढांचे के भीतर समस्याओं के समाधान और प्रणाली में सुधार की क्षमता प्रदान करना।

गुणवत्ता की अवधारणा और शब्दावली IPC और बुनियादी अवधारणाओं प्रक्रिया दृष्टिकोण समस्या क्या है? समस्या को हल करने के लिए व्यवस्थित दृष्टिकोण डेटा क्या है और इसे कैसे एकत्र किया जाता है? डेटा विश्लेषण तकनीक (स्कोर आरेख, हिस्टोग्राम, वितरण आरेख, मोशन ग्राफ, नियंत्रण चार्ट) समस्या विश्लेषण तकनीक (प्रवाह आरेख, फिशबोन, स्वोट विश्लेषण, बल क्षेत्र विश्लेषण, कारण विश्लेषण, परेतो) आइडिया जनरेशन और निर्णय लेने की प्रक्रिया यह तकनीक का उपयोग करना चाहिए। केस स्टडी कैसी है?

प्रतिभागी प्रोफाइल: सभी कर्मचारी।

परीक्षा: प्रशिक्षण के अंत में, परीक्षा संभव है।

प्रशिक्षक: हमारे अंतर्राष्ट्रीय लीड लेखा परीक्षकों और प्रशिक्षण विशेषज्ञों द्वारा परेतो विश्लेषण क्या है प्रदान किया गया। प्रशिक्षण से पहले की घोषणा की।

शिक्षा की तिथि: शिक्षा से पहले घोषित।

प्रशिक्षण की अवधि: 1 दिन।

प्रशिक्षण स्थान: कंपनी प्रशिक्षण हॉल या प्रशिक्षण से पहले।

प्रमाणपत्र: प्रशिक्षण के अंत में, प्रतिभागियों को एक प्रमाण पत्र दिया जाता है।

परैटो अनुकूलतम | परैटो मानदण्ड | परैटो अनुकूलतम की दशाएँ

वी० परैटो सर्वप्रथम अर्थशास्त्री थे जिन्होंने उपयोगिता के क्रमवाचक विचार (ordinal concept of utility) के आधार पर कल्याणकारी अर्थशास्त्र का विचार प्रस्तुत किया। परैटो ने उपयोगिता की मापनीयता तथा उसकी अन्तर्वैयक्तिक तुलना के विचार को गलत सिद्ध किया तथा स्पष्ट किया कि पूर्ण प्रतियोगिता समाज को अनुकूलतम कल्याण की स्थिति को प्राप्त करने में सहायक होती है। अत: परैटो ने सामान्य अनुकूलतम (General optimum) का विचार प्रस्तुत किया। परैटो की सामान्य (अथवा सामाजिक) अनुकूलतम वह स्थिति है जिसके अन्तर्गत साधनों (inputs) अथवा उत्पादन (outputs) पुनराबंटन (re-allocation) द्वारा बिना कम से कम एक व्यक्ति को हीनतर (worse off) किए हुए किसी अन्य व्यक्ति को श्रेष्ठतर (better off) करना सम्भव नहीं होता है। जैसा कि परैटो ने स्वयं स्पष्ट रूप में लिखा है, “हम लोग अधिकतम सन्तुष्टि या कल्याण की स्थिति को परिभाषित करते हैं जिसके अन्तर्गत किसी प्रकार का ऐसा सूक्ष्म परिवर्तन करना असम्भव होता है कि स्थिर रहने वाली संतुष्टियों को छोड़कर, सभी व्यक्तियों की सन्तुष्टियाँ बढ़ जाएँ अथवा घट जाएँ। इस प्रकार परैटो अनुकूलतम की दशा में संसाधनों के पुनर्गठन द्वारा बिना किसी अन्य व्यक्ति के कल्याण को कम किए किसी अन्य व्यक्ति के कल्याण में वृद्धि करना असम्भव होता है। अत: यदि किसी स्थिति में समाज से वस्तुओं तथा सेवाओं अथवा उत्पादन के साधनों के विभिन्न प्रयोगों में पुनर्वितरण द्वारा कल्याण में वृद्धि सम्भव है तो वह अनुकूलतम दशा नहीं होगी।

परैटो मानदण्ड (Pareto Criterion)

परैटो के मानदण्ड के अनुसार यदि कोई परिवर्तन किसी को हानि नहीं पहुँचाता तथा कुछ लोगों को श्रेष्ठतर बनाता है, तो वह सुधार है। जैसा कि बॉमल (Baumol) ने स्पष्ट से व्याख्या निम्न शब्दों में की है : “कोई परिवर्तन जो किसी को हानि नहीं पहुँचाता तथा कुछ लोगों को (इनके स्वयं के अनुमान में) श्रेष्ठतर बनाता है, आवश्यक रूप से सुधार समझा जाना चाहिए।”

परैटो के इस विचार को एजवर्थ बाउले बॉक्स रेखाचित्र द्वारा सरलतापूर्वक समझा जा सकता है जो उपयोगिता की अमापनयीता तथा अन्तर्वैयक्तिक तुलना की असत्यता की मान्यता पर आधारित है। माना कि समाज परेतो विश्लेषण क्या है में दो व्यक्ति A तथा B है जो वस्तु X तथा Y का उपभोग करते हैं। X तथा Y के विभिन्न संयोगों के उपभोग से प्राप्त होने वाले दोनों व्यक्तियों के सन्तोष के स्तर अनधिमान वक्रों द्वारा प्रदर्शित है। रेखाकृति में A तथा B व्यक्ति के मूल बिन्दु क्रमश: 0 तथा 0B हैं। अत: Ia1, Ia2, Ia2 क्रमश: A व्यक्ति के बढ़ते हुए सन्तोष को प्रदर्शित करते हैं। इसी प्रकार Ial, la2, Ia3 , B व्यक्ति की क्रमशः बढ़ती सन्तुष्टि को प्रदर्शित करते हैं। माना कि X तथा Y वस्तुओं का A तथा B व्यक्ति में वितरण की स्थिति K है जो स्पष्ट करता है कि A व्यक्ति के पास X वस्तु की OG तथा Y वस्तु की GK मात्रा है। इसी प्रकार B व्यक्ति के पास X वस्तु की KF तथा Y वस्तु की KE मात्रा है। इस प्रकार X तथाY वस्तु की कुल मात्रा A तथा B व्यक्तियों में वितरित है।

परैटो मानदण्ड के अनुसार यदि K बिन्दु से S बिन्दु की ओर कोई पुनर्वितरण होता है तो B व्यक्ति की सन्तुष्टि पूर्ववत् रहती है किन्तु A व्यक्ति के सन्तोष का स्तर पहले की परेतो विश्लेषण क्या है अपेक्षा बढ़ जाता है क्योंकि B व्यक्ति एक ही अनधिमान वक्र I a1 पर रहता है (K तथा S, IaI, पर ही है) तथा A व्यक्ति Ia2 की अपेक्षा ऊँचे अनधिमान वक्र Ia2 पर पहुँच जाता है। अत: K बिन्दु परैटो के अनुसार सामान्य अनुकूलतम की स्थिति (position of general optimum) नहीं है।

इसी प्रकार यदि K से R की ओर कोई परिवर्तन किया जाता है तो भी A व्यक्ति का सन्तोष पूर्ववत् तथा B व्यक्ति का सन्तोष पहले की अपेक्षा बढ़ जाता है। अतः R तथा S दोनों स्थितियाँ K की अपेक्षा श्रेष्ठ है। दोनों व्यक्तियों के विभिन्न अनधिमान वक्रों के स्पर्श बिन्दु सामान्य अनुकूलतम के बिन्दु होते हैं। जिन्हें एक वक्र से जोड़ देने पर प्रसंविदा वक्र (contract curve) प्राप्त हो जाता है। इस वक्र पर यदि हम ऊपर अथवा नीचे की ओर चलते हैं तो एक के संतोष में वृद्धि होती है तो दूसरे के सन्तोष में कमी हो जाती है जिसके कारण इसे संघर्ष वक्र (conflict curve) भी कहते हैं। उपर्युक्त रेखाकृति विश्लेषण में R तथा S में से कौन सी स्थिति अपेक्षाकृत श्रेष्ठ है, इस प्रश्न का उत्तर परैटो का मानदण्ड प्रदान नहीं करता है।

परैटो के सामान्य अनुकूलतम को सैम्युल्सन द्वारा प्रस्तुत उपयोगिता सम्भावना वक्र (utility possibility curve) द्वारा भी स्पष्ट किया जा सकता है। “उपयोगिता सम्भावना वक्र वस्तुओं के एक निश्चित समूह से दो व्यक्तियों द्वारा प्राप्त उपयोगिताओं के विभिन्न संयोगों का बिन्दु पथ है।” रेखाकृति में X तथा Y अक्ष पर क्रमश: A तथा B व्यक्ति की उपयोगिता को प्रदर्शित किया गया है। CV वक्र दोनों व्यक्तियों द्वारा प्राप्त की जाने वाली उपयोगिताओं के विभिन्न संयोगों को प्रदर्शित करता है जो कि उन्हें वस्तुओं की एक निश्चित मात्रा के सम्मिलित रूप से उपभोग से प्राप्त होती है। दो व्यक्तियों में वस्तुओं की वितरित मात्रा में परिवर्तन के साथ उनकी उपयोगिताओं के स्तर भी परिवर्तित हो जाते हैं।

परैटो के मानदण्ड के अनुसार Q बिन्दु से E, D तथा S बिन्दु की ओर कोई परिवर्तन सामाजिक कल्याण में वृद्धि को प्रकट करता है क्योंकि इसके परिवर्तन स्वरूप A अथवा B अथवा दोनों की उपयोगिताओं में वृद्धि होती है। किन्तु Q बिन्दु से RS के बाहर की ओर किसी परिवर्तन के कल्याण पर प्रभावों को परैटो के मानदण्ड से ज्ञात नहीं किया जा सकता है। इस प्रकार E बिन्दु परैटो अनुकूलतम की स्थिति को व्यक्त नहीं करता है तथा CV वक्र के RS भाग पर स्थित सभी बिन्दु परैटो अनुकूलतम की स्थितियाँ हैं किन्तु कौन सा बिन्दु श्रेष्ठतम है? परैटो मानदण्ड इसका उत्तर देने में असमर्थ रहता है क्योंकि इसके लिए कुछ मूल्यगत निर्णयों का आश्रय लेना आवश्यक है जिसको परैटो अपने विश्लेषण में समाविष्ट नहीं करते हैं।

परैटो अनुकूलतम की दशाएँ (Conditions of Pareto Optimum)

परैटो ने सामाजिक कल्याण को अधिकतम (अनुकूलतम) करने के लिए उत्पादन तथा विनिमय क्षेत्र की अनेक दशाओं की व्याख्या की है जिसके द्वारा परेतो विश्लेषण क्या है उत्पादन तथा उनके वितरण को अधिकतम सामाजिक कल्याण के अनुरूप बनाने का प्रयत्न किया जाता है। यहाँ पर परैटो अनुकूलतम की विभिन्न दशाओं की व्याख्या करने के पूर्व उनकी मान्यताओं के विषय में जान लेना आवश्यक प्रतीत होता है।

अर्थशास्त्र – महत्वपूर्ण लिंक

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ताकिक तथा अताकिक क्रियाएँ

परेटो ने तार्किक क्रियाओं तथा इनसे सम्बन्धित विभिन्न प्रकार के मानव व्यवहारों को ही समाजशास्त्र की मुख्य अध्ययन – वस्तु के रूप में स्वीकार किया है । यही कारण है कि उन्होंने अपने चिन्तन में अतार्किक क्रियाओं की तुलना में इन क्रियाओं की प्रकृति को विस्तार से स्पष्ट किया । परेटो का विचार है कि सभी मानवीय क्रियाओं को मुख्य रूप से दो भागों में विभाजित किया जा सकता है :

( क ) ताकिक क्रियाएँ ( Logical Actions ) तथा

( ख ) अतार्किक क्रियाएँ ( Non Logical Actions ) ।

यदि सामान्य शब्दों में इनकी प्रकृति को समझा जाय तो यह कहा जा सकता है कि तार्किक क्रियाएं वस्तुनिष्ठ ( Objective ) होती हैं जबकि अतार्किक क्रियाओं का आधार भावनात्मक ( Subjective ) होता है । इसका तात्पर्य है कि जब कोई क्रिया को और दूसरे व्यक्तियों के दृष्टिकोण से यथार्थ होती है तब उसे ताविक क्रिया कहा जाता है लेकिन जब कोई क्रिया कुछ भ्रान्त तर्को , भावनाओं अथवा संवेगों पर आधारित होती है तब इसे अतार्किक क्रिया कहा जा सकता है । परेटो का कथन है कि ‘ कोई क्रिया तब तार्किक होती है यदि उससे सम्बन्धित लक्ष्य को वस्तुनिष्ठ रूप से प्राप्त किया जा सके तथा सर्वोत्तम ज्ञान के आधार पर उस लक्ष्य को प्राप्त करने से सम्बन्धित साधन भी उससे यथार्थ रूप से सम्बन्धित हों । इस प्रकार कर्ता तथा उस विषय परेतो विश्लेषण क्या है का ज्ञान रखने वाले व्यक्तियों के मस्तिष्क में जब किसी क्रिया के लक्ष्य और साधनों के बीच एक तार्किक सम्बन्ध स्पष्ट होता है तब ऐसी क्रिया को हम तार्किक क्रिया कहते हैं । अतार्किक क्रिया का तात्पर्य ऐसी सभी मानवीय क्रियाओं से है जो उपयुक्त अर्थ में ताकिकता की परिधि से बाहर होती हैं । यह क्रियाएँ एक ‘ अवशिष्ट श्रेणी ‘ ( Residual Category ) को प्रदर्शित करती हैं । ” स्पष्ट है कि मानव व्यवहारों में ताकिक क्रियाओं की अपेक्षा अतार्किक क्रियाओं का अधिक समावेश होता है । इस तथ्य को एक उदाहरण की सहायता से स्पष्ट करते हए परेटो ने लिखा है कि समाज के नागरिक कानून को अपने सैद्धान्तिक रूप में तार्किक क्रिया का प्रतिनिधित्व करने वाला समझा जाता है लेकिन इस पर आधा रित न्यायाधीश का व्यवहार साधारणतया अतार्किक ही होता है । परेटो के शब्दों में , ” न्यायालय के निर्णय भी एक बड़ी सीमा तक समाज में प्रचलित भावनाओं तथा हितों पर निर्भर होने के साथ ही बहुत कुछ व्यक्तिगत विचारों तथा संयोग से प्रभावित होते हैं । अनेक अवसरों पर यह निर्णय किसी संहिता अथवा लिखित कानन से बिल्कुल भी सम्बन्धित नहीं होते । ” इसका तात्पर्य है कि अनेक निर्णय यद्यपि वैयक्तिक धारणा से प्रभावित होते हैं लेकिन उन्हें कानून के आधार पर तर्कसंगत प्रमाणित कर दिया जाता है । इस प्रकार किसी परेतो विश्लेषण क्या है भी निर्णय की प्रक्रिया में जो आन्त रिक शक्तियाँ क्रियाशील होती हैं , वे ही तार्किक तथा अतार्किक क्रियाओं के नाजुक विभेद को स्पष्ट करती हैं ।

उपर्युक्त आधार पर ) परेटो ने स्पष्ट किया कि तार्किक और अतार्किक क्रिया का विभेद मुख्य रूप से इस वास्तविकता पर आधारित है कि किसी क्रिया के लक्ष्य और साधनों के बीच ताकिक संगति कितनी अधिक या कम है । इसका तात्पर्य है कि प्रत्येक व्यक्तिगत क्रिया के दो पक्ष होते हैं लक्ष्य और साधन । कुछ क्रियाएँ ऐसी होती हैं जिनके द्वारा तार्किक आधार पर लक्ष्य और साधनों के बीच एक स्पष्ट सामंजस्य देखने को मिलता है । इन्हीं क्रियाओं को हम वस्तुनिष्ठ अथवा तार्किक क्रियाएं कहते हैं । दूसरी ओर अनेक क्रियाएँ अथवा मानव व्यवहार इस प्रकार के होते हैं जिनमें लक्ष्य तथा साधनों के बीच कोई तार्किक संगति देखने को नहीं मिलती । यह क्रियाएँ भावनाप्रधान होती हैं और इसीलिए इन्हें अतार्किक किया कहा जा सकता है । परेटर्टी ने स्पष्ट किया कि केवल तर्क पर आधारित क्रियाओं को ही तार्किक क्रिया नहीं कहा जा सकता क्योंकि प्रत्येक क्रिया किसी न किसी तर्क पर अवश्य ही आधारित होती है ।

अन्तर केवल इतना है कि किसी क्रिया के लिए जो तर्क दिया जाय वह कर्ता के अपने दृष्टिकोण या औचित्य पर आधारित हो अथवा वह तर्क प्रामाणिक या अनुभवसिद्ध हो । इसका तात्पर्य है कि कुछ क्रियाएं ऐसी होती हैं जिनके लक्ष्य और साधनों को कर्ता अनेक ऐसे तर्कों के आधार पर स्पष्ट कर देता है जो केवल उसी के दृष्टिकोण से उचित होते हैं । इस तरह के तर्क को परेटो ने ‘ भ्रान्त तर्क ‘ ( Derivation ) कहा है । ऐसे तर्कों पर आधारित क्रियाएं ही अतार्किक क्रियाएँ हैं । इसके विपरीत , जब कोई क्रिया केवल कर्ता के दृष्टिकोण से नहीं बल्कि उन व्यक्तियों के दृष्टिकोण से भी प्रामाणिक तर्क पर आधारित होती है जिन्हें उस विषय का अधिक व्यापक ज्ञान हो , तब ऐसी क्रिया को तार्किक क्रिया कहा जाता है । वास्तविकता यह है कि प्रामाणिक तर्क वे . ही होते हैं जो निरीक्षण और अनुभव पर आधारित होते हैं ।

ऐसे तर्कों का आधार किसी तरह की आत्म – सन्तुष्टि , भ्रान्ति अथवा कल्पना नहीं होती । इनकी वास्तविकता को निरीक्षण या प्रयोग के द्वारा कभी भी सिद्ध किया जा सकता है । इस प्रकार किसी भी विज्ञान का कार्य मुख्यतः तार्किक क्रियाओं के अध्ययन द्वारा ही सामान्य नियमों का प्रतिपादन करना है । इस आधार पर तार्किक क्रियाओं को पुनः परिभाषित करते हुए परेटो ने लिखा कि केवल वे क्रियाएँ ही तार्किक क्रियाएं हैं जो प्रामाणिक तर्क के आधार पर लक्ष्य और साधनों को एक – दूसरे से जोडती हैं केवल उस क्रिया को करने वाले कर्ता के दृष्टिकोण से ही नहीं बल्कि उन व्यक्तियों के दृष्टिकोण से भी जिन्हें उसके विषय में अधिक व्यापक ज्ञान होता है । ” एक विज्ञान की परेतो विश्लेषण क्या है अध्ययन वस्तु के रूप में जाकिक क्रियाओं के महत्त्व को स्वीकार करने के बाद भी परेटो के अनुसार अतार्किक क्रियाओं के सामाजिक प्रभाव की अवहेलना नहीं की जा सकती । इस परेतो विश्लेषण क्या है सम्बन्ध में परेटो ने लिखा है , ” तार्किक प्रयोगात्मक पद्धति पर आधारित तर्कसंगत क्रियाओं का क्षेत्र इतना छोटा है कि यह मानव व्यवहारों की सम्पूर्ण परिधि के एक छोटे – से भाग को ही स्पष्ट कर पाती हैं । अधिकांश दशाओं में विज्ञान हमें अपने लक्ष्यों का निर्धारण करने अथवा अपनी क्रियाओं के परिणामों का पूर्वानुमान करने में सहायता नहीं दे पाता । यही कारण है कि मानवीय व्यवहारों का अधिकांश भाग अताकिक ही होता है । ” मनोवैज्ञानिक रूप से स्पष्ट होता है कि प्रत्येक व्यक्ति अपने व्यवहार को तार्किक रूप से उचित प्रदर्शित करने का प्रयत्न करता है । इसका तात्पर्य है कि कोई व्यक्ति जब अपने व्यवहार अथवा क्रिया में प्रामाणिक तार्किकता का समावेश नहीं कर पाता तब वह अपने व्यवहार को तार्किकता की वेश – भूषा पहनाकर उसे दूसरे लोगों के सामने ताकिक प्रमाणित करने का प्रयत्न ( Logicalize ) करता है ।

इस दष्टिकोण से अतार्किक क्रियाओं का क्षेत्र बहुत व्यापक होने के बाद भी वे केवल कर्ता की आत्म भ्रान्ति ( Self – diception ) को स्पष्ट करती हैं बल्कि सार्वजनिक कपट ( Public Deceit ) की भी परिचायक होती हैं । सच तो यह है कि समाज में प्रचलित विभिन्न निषेध ( Tabons ) , गाथाएं और जनरीतियाँ अधिकांशतः अतार्किक क्रियाओं का ही प्रतिनिधित्व करती हैं । इसके बाद भी अतार्किक क्रियाओं को निरर्थक अथवा समाज को विघटित करने वाली ( Pathological ) नहीं कहा जा सकता । परम्पराओं के पालन के रूप में अनेक अतार्किक व्यवहार समूह में अक्सर संगठन और एकीकरण की प्रक्रिया में भी वृद्धि करते हैं जिसका रूप अनेक आदिम समूहों के उत्सवों में देखने को मिलता है । पूरेटो द्वारा प्रस्तुत तार्किक तथा अतार्किक क्रिया की अवधारणा को सार रूप में ऐरों ( R . Aron ) द्वारा दिए गये अपांकित चित्र की सहायता से समझा सकता है :

तार्किक तथा अतार्किक क्रियाओं के इस सम्पूर्ण विश्लेषण द्वारा परेटो ने यह स्पष्ट किया कि अतार्किक क्रियाएं भले ही समाज में व्यापक रूप से पायी जाती हों लेकिन यह प्रामाणिक और अनुभवसिद्ध न होने के कारण किसी विज्ञान की अध्ययन वस्तु नहीं बन सकतीं । समाजशास्त्र स्वयं एक ऐसा विज्ञान है जो तार्किक प्रयोगात्मक पद्धति के आधार पर ही विकसित हो सकता है । इस दृष्टिकोण से समाजशास्त्रीय अध्ययनों में केवल तार्किक क्रियाओं का ही समावेश होना चाहिए ।

रचनात्मकता, समस्या हल और निर्णय लेने Convertas

यह एक ऐसी प्रक्रिया है जो आपके सामने आने वाली समस्याओं और अवसरों को फिर से परिभाषित करने में मदद करती है, नए, नए जवाब और समाधान लेकर आती है और फिर कार्रवाई करती है। उपयोग किए गए उपकरण और तकनीक प्रक्रिया को मज़ेदार, आकर्षक और सहयोगी बनाते हैं।

रचनात्मकता, समस्याएं सुलझाने और निर्णय लेने से न केवल आपको बेहतर समाधान बनाने में मदद मिलती है, यह एक सकारात्मक अनुभव बनाता है जो नए विचारों को अपनाने में तेजी लाता है। सोच तंत्र को समझने के बाद, हम आपको उन तरीकों और उपकरणों के परेतो विश्लेषण क्या है साथ प्रदान करेंगे जिन्हें आप सत्रों के दौरान अभ्यास करेंगे और जो आपको काम पर या जीवन में मदद कर सकते हैं, और सबसे सांसारिक स्थितियों से लेकर सबसे कठिन या असामान्य तक

उद्देश्य

  • निर्णय लेने, महत्वपूर्ण सोच और रचनात्मक समस्या को सुलझाने के कौशल का निर्माण और विस्तार करें
  • समस्याओं को हल करने और निर्णय लेने के लिए तार्किक और रचनात्मक दृष्टिकोण लागू करें
  • कारणों की पहचान करने और समाधान उत्पन्न करने के लिए पारंपरिक और रचनात्मक उपकरणों का उपयोग करें
  • व्यावसायिक उपकरण के रूप में रचनात्मकता और पार्श्व सोच को रोजगार दें
  • काम पर उनके सामने आने वाली वास्तविक समस्याओं का विश्लेषण और समाधान करें
  • 'सही सवाल' पूछने और जटिल निर्णय लेने के तनाव पर काबू पाने का विश्वास हासिल करें
  • ऊपरी प्रबंधन के साथ विश्वसनीयता का प्रदर्शन और निर्माण करें
  • समस्या-समाधान और निर्णय लेने के लिए रणनीतिक दृष्टिकोण विकसित करें

किसको उपस्थित रहना चाहिए

प्रबंधक, पर्यवेक्षक और प्रशासक जो बेहतर समस्या को हल करने और निर्णय लेने के कौशल से लाभान्वित होंगे, और व्यावसायिक पेशेवर जो सही चाल और निर्णय लेने के लिए अपने अनुभव और अंतर्ज्ञान दोनों का उपयोग करके अपने महत्वपूर्ण सोच को अगले स्तर तक ले जाना चाहते हैं।

what is Statistical Quality Control in Hindi?

Statistical Quality Control Kya Hai? In Hindi-

सांख्यिकी का अर्थ है विश्वसनीय परिणाम प्राप्त करने के लिए डेटा की अच्छी मात्रा। आँकड़ों के विज्ञान कुछ निष्कर्ष निकालने के लिए इस डेटा को संभालता है। इसकी तकनीकों में गुणवत्ता नियंत्रण, उत्पादन योजना और नियंत्रण, व्यापार चार्ट, रैखिक प्रोग्रामिंग आदि में व्यापक अनुप्रयोग मिलते हैं।

गुणवत्ता एक सापेक्ष शब्द है और आमतौर पर उत्पाद के अंतिम उपयोग के संदर्भ में समझाया जाता है। इस प्रकार गुणवत्ता को उद्देश्य के लिए फिटनेस के रूप में परिभाषित किया गया है।

नियंत्रण एक घटना को मापने और जांचने या निरीक्षण करने के लिए एक प्रणाली है। यह सुझाव देता है कि कब निरीक्षण करना है, कितनी बार परेतो विश्लेषण क्या है निरीक्षण करना है और कितना निरीक्षण करना है, कितनी बार निरीक्षण करना है। नियंत्रण किसी वस्तु की गुणवत्ता विशेषताओं का पता लगाता है, निर्धारित गुणवत्ता मानकों के साथ उसकी तुलना करता परेतो विश्लेषण क्या है है और दोषपूर्ण वस्तु को गैर-दोषपूर्ण लोगों से अलग करता है।

Statistical quality control उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता की निगरानी और रखरखाव में सांख्यिकीय विधियों के उपयोग को संदर्भित करता है। एक विधि, जिसे स्वीकृति नमूने के रूप में जाना जाता है, का उपयोग तब किया जा सकता है जब नमूने में पाए गए गुणवत्ता के आधार पर भागों या वस्तुओं के एक समूह को स्वीकार करने या अस्वीकार करने का निर्णय लिया जाना चाहिए। एक दूसरी विधि, जिसे सांख्यिकीय प्रक्रिया नियंत्रण के रूप में जाना जाता है, यह निर्धारित करने के लिए कि क्या प्रक्रिया को जारी रखा जाना चाहिए या वांछित गुणवत्ता प्राप्त करने के लिए समायोजित किया जाना चाहिए, ग्राफिकल डिस्प्ले का उपयोग नियंत्रण चार्ट के रूप में किया जाता है।

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