विदेशी मुद्रा पर पैसे कैसे बनाने के लिए?

बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है?

बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है?
रोचक तथ्य: 2008 में पहली बार ब्लॉकचेन के लाइव होने पर माइनिंग रिवॉर्ड 50 बिटकॉइन (BTC) था। 210,000 ब्लॉक जोड़े जाने तक भुगतान अपरिवर्तित रहा, जिसके बाद इसे आधा कर दिया गया (आधा बना दिया गया)। अगले 210, 000 ब्लॉक जोड़े बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? जाने के बाद, प्रक्रिया दोहराई जाती है। इसे बिटकॉइन विभाजन के रूप में जाना जाता है ।

क्या है बिटकॉइन जिसकी कीमत आसमान छू रही है

क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन की कीमत बुधवार को पहली बार 20 हजार डॉलर के पार चली गई है. आखिर क्या है ये करेंसी और कैसे काम करती है. दुनिया भर में कभी यह कुख्यात भी हई थी.

तीन साल पहले यही वो वक्त था जब पहली बार अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट में इसके कारोबार को मंजूरी मिली और तब इसकी कीमत आसमान पर पहुंच गई. बीच में काफी बुरा हाल देखने के बाद इसकी कीमत नई ऊंचाइयों को छू रही है.

अनिश्चितता के दौर में पैसा सुरक्षित रखने के दूसरे तरीकों की तरह ही बिटकॉइन को भी कोरोना महामारी से काफी फायदा हुआ है. सोना, चांदी, प्लैटिनम की कीमत इस दौर में कई गुना बढ़ी है और बिटकॉइन भी इसमें शामिल हो गया है. बिटकॉइन की खास संरचना के कारण अब और बिटकॉइन ज्यादा संख्या में नहीं बन पा रहा है ऐसे में जो बिटकॉइन हैं उनका कारोबार तेज हो गया है.

बिटकॉइन कैसे काम करता है

बिटकॉइन एक डिजिटल मुद्रा है. यह किसी बैंक या सरकार से नहीं जुड़ी है और इसे बिना पहचान जाहिर किए खर्च किया जा सकता है. बिटकॉइन के इन सिक्कों को यूजर बनाते हैं. इसके लिए उन्हें इनको "माइन" करना पड़ता है. "माइन" के लिए उन्हें गणना करने की क्षमता देनी होती है और इसके बदले में उन्हें बिटकॉइन मिलते हैं. बिटकॉइन के सिक्कों को शेयर बाजारों में अमेरिकी डॉलर और दूसरी मुद्राओं के बदले खरीदा भी जा सकता है. कुछ कारोबार में बिटकॉइन मुद्रा के रूप में इस्तेमाल होती है हालांकि बीते कुछ सालों में इसकी लोकप्रियता ठहरी हुई है.

तस्वीर: picture-alliance/empics/D. Lipinski

बिटकॉइन के साथ क्या हुआ है

दिसंबर 2017 में बिटकॉइन फ्यूचर को अमेरिकी शेयर बाजार वॉल स्ट्रीट में कारोबार की इजाजत मिली. शिकागो मर्केंटाइल एक्सचेंज और शिकागो बोर्ड ऑप ट्रेड ने इनकी खरीद बिक्री को मंजूरी दी थी. बिटकॉइन को लेकर दिलचस्पी इतनी ज्यादा थी कि कारोबार की अनुमति मिलते ही इसकी कीमतों में भारी उछाल आया. 2017 के शुरुआत में इस मुद्रा की कीमत 1000 डॉलर थी जो साल के आखिर में बढ़ कर 19,783 तक पहुंच गई.

हालांकि कारोबार शुरू होने के बाद बिटकॉइन फ्यूचर अगले कुछ महीनों में तेजी से नीचे आया. एक साल बाद ही इसकी कीमत घट कर 4000 डॉलर पर चली गी. निवेशकों और बिटकॉइन में दिलचस्पी रखने वालों ने बताया कि 2017 में आए उछाल की बड़ी वजहें सट्टेबाजी और मीडिया का आकर्षण थे.

अभी बिटकॉइन का क्या मोल है

कॉइनबेस के मुताबिक एक बिटकॉइन की कीमत लगभग 20,700 डॉलर है. कॉइनबेस एक प्रमुख डिजिटल करेंसी एक्सचेंज है जो दूसरे टोकन और मुद्राओं का भी कारोबार करती है. हालांकि बिटकॉइन की कीमत अस्थिर है बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? और यह एक हफ्ते में ही सैकड़ों या हजारों डॉलरों का उतार चढ़ाव देखती है. एक महीने पहले इसकी कीमत 17,000 डॉलर थी और एक साल पहले 7000 डॉलर.

बिटकॉइन एक बहुत जोखिम वाला निवेश है और पारंपरिक निवेश के तरीकों जैसे कि शेयर या फिर बॉन्ड की तरह व्यवहार नहीं करता, जब तक कि खरीदार कई सालों तक इस मुद्रा को अपने पास ना रखे. उदाहरण के लिए एसोसिएटेड प्रेस ने 100 अमेरिकी डॉलर की कीमत के बिटकॉइन खरीदे ताकि वह इस मुद्रा पर नजर रख सके और व्यापार में इसके इस्तेमाल के बारे में खबर दे सके. इस पोर्टफोलियो का खर्च इस महीने जा कर अपने मूलधन पर पहुंचा है.

बिटकॉइन को इतना पसंद क्यों किया गया

बिटकॉइन वास्तव में एक कंप्यूटर कोड की श्रृंखला है. यह जब भी एक यूजर से दूरे के पास जाता है तो इस पर डिजिटल सिग्नेचर किए जाते हैं. लेन देन खुद को गोपनीय रख कर भी किया जा सकता है. इसी वजह से यह आजाद ख्याल के लोगों, तकनीकी दुनिया के उत्साही, सटोरियों और अपराधियों के बीच काफी लोकप्रिय है.

बिटकॉइन को डिजिटल वॉलेट में रखा जाता है. इस वॉलेट को या तो कॉइनबेस जैसे एक्सचेंज के जरिए ऑनलाइन हासिल किया जा सकता है या फिर ऑफलाइन हार्ड ड्राइव में एक खास सॉफ्टवेयर के जरिए. बिटकॉइन का समुदाय यह तो जानता है कि कितने बिटकॉइन हैं लेकिन वे कहां हैं इसके बारे में सिर्फ अंदाजा ही लगाया जा सकता है.

कौन इस्तेमाल करता है बिटकॉइन

कुछ कारोबार बिटकॉइन का इस्तेमाल कर रहे हैं जैसे कि ओवरस्टॉक डॉट कॉम बिटकॉइन में भुगतान स्वीकार करता है. मुद्रा इतनी मशहूर है कि ब्लॉकचेन. इंफो के मुताबिक औसतन हर दिन 3,00,000 लेने देन होते हैं. हालांकि इसकी लोकप्रियता नगद या क्रेडिट कार्ड की तुलना में कम ही है. बहुत सारे लोग और कारोबार में इसे भुगतान के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.

बिटकॉइन की सुरक्षा

बिटकॉइन नेटवर्क सामूहिक अच्छाई के लिए कुछ लोगों की लालसा पर निर्भर करता है. तकनीक के जानकार कुछ लोग जिन्हें माइनर कहा जाता है वो इस तंत्र में गणना की क्षमता ब्लॉकचेन में डाल कर इसे ईमानदार बनाए रखते हैं. ब्लॉक चेन हर बिटकॉइन के लेनदेन का हिसाब रखता है. इस तरह से यह उन्हें दो बार बेचे जाने को रोकता है और माइनरों को उनकी कोशिशों के लिए जब तक तोहफों में बिटकॉइन दिए जाते हैं. जब तक माइनर ब्लॉकचेन को सुरक्षित रखेंगे इसकी नकल करके नकली मुद्रा बनने का डर नहीं रहेगा.

यहां तक कैसे पहुंचा बिटकॉइन

यह एक रहस्य है. बिटकॉइन को 2009 में एक शख्स या फिर एक समूह ने शुरू किया जो सातोषी नाकामोतो के नाम से काम कर रहे थे. उस वक्त बिटकॉन को थोड़े से उत्साही लोग ही इस्तेमाल कर रहे थे. जब ज्यादा लोगों का ध्यान उस तरफ गया तो नाकामोतो को नक्शे से बाहर कर दिया गया. हालांकि इससे मुद्रा को बहुत फर्क नहीं पड़ा यह सिर्फ अपनी आंतरिक दलीलों पर ही चलता रहा.

2016 में एक ऑस्ट्रेलिया उद्यमी ने खुद को बिटकॉइन के संस्थापक के रूप में पेश किया. हालांकि कुछ दिनों बाद ही उसने कहा कि उसके पास सबूतों को जाहिर करने की "हिम्मत नहीं है." इसके बाद से इस मुद्रा की जिम्मेदारी किसी ने नहीं ली है.

Bitcoin के 10 साल: 15 पैसे का निवेश बन गया 4.68 लाख रुपये, ऐसे बढ़ता गया रिटर्न

1 नवंबर के ही दिन इसके खोजकर्ता एलियस सतोशी नाकामोटो ने मेट्जडोड क्रिप्टोग्राफी मेलिंग लिस्ट में पहली बार बिटकॉइन व्हाइटपेपर सबमिट किया था.

Bitcoin के 10 साल: 15 पैसे का निवेश बन गया 4.68 लाख रुपये, ऐसे बढ़ता गया रिटर्न

जनवरी 2009 में जब नाकामोटो ने पहली बार इसकी माइनिंग की थी, तब 1 बिटकॉइन की कीमत 0.003 डॉलर थी, जो बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? उस समय लगभग 15 पैसे के बराबर थी. लेकिन आज यह कीमत 6366 प्रति डॉलर पहुंच चुकी है, जो 468251.13 रुपये के बराबर है. (Reuters)

पूरी दुनिया में चर्चित हो चुकी क्रिप्टोकरेंसी बिटकॉइन के 10 साल पूरे हो चुके हैं. 31 अक्टूबर 2008 के दिन इसके खोजकर्ता ने मेट्जडोड क्रिप्टोग्राफी मेलिंग लिस्ट में पहली बार बिटकॉइन व्हाइटपेपर सबमिट किया था. कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक, जनवरी 2009 में जब उन्होंने पहली बार इसकी माइनिंग की थी, तब 1 बिटकॉइन की कीमत 0.003 डॉलर थी, जो उस समय लगभग 15 पैसे के बराबर थी. लेकिन आज यह कीमत 6366 डॉलर पहुंच चुकी है, जो 468251.13 रुपये के बराबर है. यानी अपनी शुरुआत से अब तक बिटकॉइन ने रुपये के मोर्चे पर 3,12,167,233 फीसदी और डॉलर के लिहाज से 2,12,199,900 फीसदी की ग्रोथ दर्ज की है.

(नोट: जनवरी 2009 में एक डॉलर की कीमत 48 रुपये के आसपास थी. जिस लिहाज से 0.003 डॉलर की वैल्यू करीब 15 पैसे के बराबर हुई. वहीं, 1 नवंबर 2018 को एक डॉलर की वैल्यू करीब 74 रुपये के आसपास थी. इस लिहाज से 6366 डॉलर की वैल्यू करीब 4.68 लाख रुपये हुई. इसी आंकड़े पर यह गणना की गई है.)

यानी अगर किसी ने उस वक्त बिटकॉइन में 10 डॉलर का निवेश किया होगा और आज तक वह बरकरार है तो बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? वह 2.12 करोड़ डॉलर का मालिक बन गया होगा. वहीं अगर रुपये के हिसाब से उस वक्त 1 बिटकॉइन खरीद लिया होगा, तो आज वह लगभग 4.68 लाख रुपये का मालिक होगा. 1 जनवरी 2018 को बिटकॉइन की कीमत अपने अब तक के उच्च स्तर 15,127.51 डॉलर यानी उस वक्त के लगभग 13 लाख रुपये तक पहुंच गई थी.

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भारत में लीगल टेंडर नहीं है बिटकॉइन

बिटकॉइन एक डिजिटल मुद्रा है, जिसे डिजिटल वॉलेट में रखकर ही लेन-देन किया जा सकता है. इसके जरिए बिना बैंक को माध्‍यम बनाए लेन-देन किया जा सकता है. भारत में बिटकॉइन को न तो आधिकारिक अनुमति है और न ही इसे रेग्युलेट करने का कोई नियम बना है. साथ ही इसमें ट्रेडिंग भी अवैध है. रिजर्व बैंक साफ तौर पर कह चुका है कि देश में बिटकॉइन लीगल टेंडर नहीं है.

सबसे पहले पिज्‍जा की हुई थी खरीद

भले ही बिटकॉइन डिजिटल मुद्रा है लेकिन इनसे फिजिकल चीजें खरीद सकते हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिटकॉइन से जिस चीज को सबसे पहले खरीदा बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? गया, वह थी पिज्‍जा. इस खरीद में 10000 बिटकॉइन खर्च किए गए थे.

Image: Reuters

कैसे हासिल होते हैं बिटकॉइन?

बिटकॉइन हासिल करने के तीन तरीके हैं- ऐसी कई वेबसाइट्स हैं जो फ्री बिटकॉइन ऑफर करती हैं. इसके लिए आपको कुछ टास्‍क्‍स को पूरा करना होता है और उसके बदले मे आपको बिटकॉइन मिलते हैं. इसके अलावा कैश के बदले या फिर किसी सामान के बदले भी बिटकॉइन हासिल होते हैं. जिन देशों में बिटकॉइन लीगल हैं, वहां आप कैश के बदले बिटकॉइन देने वाले सेलर या सामान के पेमेंट के रूप में बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? बिटकॉइन हासिल कर सकते हैं. तीसरा तरीका है बिटकॉइन की माइनिंग.

बिटकॉइन मा‍इनिंग का अर्थ है नए बिटकॉइन जनरेट करना या चलन में लाना. सीएनबीसी की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बिटकॉइन में किए गए ट्रान्‍जेक्‍शन वेरिफाई किए जाते हैं. इसके लिए इन्‍हें एक पब्लिक अकाउंट में एड कर दिया जाता है, जिसे ब्‍लॉक चेन कहते हैं. इसमें बिटकॉइन में लेन-देन करने वाले दुनिया के हर इन्‍सान का ट्रान्‍जेक्‍शन एड रहता है. ब्‍लॉकचेन पर एक पैडलॉक होता है, जिसे एक डिजिटल की से खोला जा सकता है. उस की को हासिल कर लेने पर आपका बॉक्‍स ओपन होता है और ट्रान्‍जेक्‍शन वेरिफाई हो जाता है. तब आपको नए 25 बिटकॉइन हासिल होते हैं.

बिटकॉइन की खो जाने पर गवां बैठते हैं सारे बिटकॉइन

फैक्‍टसाइट की एक रिपोर्ट के मुताबिक बिटकॉइन एक डिजिटल वॉलेट में सेव होते हैं और इनकी एक डिजिटल की होती है. अगर आपसे यह की खो जाती है तो वॉलेट भी खो जाता है यानी आप अपने कमाए हुए बिटकॉइन गंवा देते हैं. साथ ही कोई और भी इन बिटकॉइन का इस्‍तेमाल नहीं कर सकता. यानी ये सर्कुलेशन से ही बाहर हो जाते हैं.

कैसे हासिल होता है बिटकॉइन वॉलेट?

ऐसी कई साइट्स हैं, जो डिजिटल करेंसी के लिए वॉलेट उपलब्‍ध कराती हैं. जैसे ब्‍लॉकचेन और कॉइनबेस. इन साइट्स पर बिटकॉइन के लिए वॉलेट भी उपलब्‍ध हैं. इसके अलावा स्‍मार्टफोन के लिए बिटकॉइन वॉलेट के एप्‍स भी मौजूद हैं.

बिटकॉइन में लेन-देन करने वालों को ट्रेस करना है मुश्किल

जब आप बिटकॉइन में लेन-देन करते हैं तो आपके नाम या पहचान का इस्‍तेमाल नहीं होता है. केवल एक बिटकॉइन एड्रेस होता है, जिसके जरिए सभी ट्रान्‍जेक्‍शंस का रिकॉर्ड रहता है. हालांकि यह एक 34 अल्‍फान्‍यूमेरिक कैरेक्‍टर वाला एड्रेस होता है, जिसके जरिए लेन-देन करने वालों का पता लगाना मुश्किल होता है लेकिन यह नामुमकिन नहीं है.

बिटकॉइन को भुनाते कैसे हैं?

क्रिप्‍टोकरेंसी हेल्‍प डॉट कॉम के मुताबिक अमेरिका, कनाडा, ब्रिटेन जैसे कई देश ऐसे हैं, जहां बिटकॉइन के बदले कैश या फिर बिटकॉइन की कीमत के हिसाब से पैसे आपके डेबिट कार्ड में ट्रान्‍सफर कर दिए जाते हैं. इसके बदले आप भी किसी को कैश के बदले बिटकॉइन दे सकते हैं. साथ ही जिन देशों में ऑनलाइन बिटकॉइन एक्‍सचेंज मौजूद है और यह लीगल है, वहां पर रजिस्‍ट्रेशन करा बिटकॉइन की बिक्री की जा सकती है.

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Cryptocurrency Value: क्या आप जानते हैं कैसे तय होती है किसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत? यहां समझें पूरा गणित

Cryptocurrency Value : क्रिप्टोकरेंसी की कीमत डिमांड और सप्लाई के सीधे सिद्धांत पर तय होती है, लेकिन इसके अलावा ऐसे बहुत से दूसरे फैक्टर भी हैं, जो इनकी कीमतें तय करने में भूमिका निभाते हैं.

Cryptocurrency Value: क्या आप जानते हैं कैसे तय होती है किसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत? यहां समझें पूरा गणित

Cryptocurrency Price : क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें कई फैक्टर्स को ध्यान में रखकर तय होती हैं.

क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) की शुरुआत हुए लगभग एक दशक हो चुके हैं, लेकिन इसके मुकाबले इनकी पॉपुलैरिटी पिछले कुछ सालों में बढ़ी है. बहुत से लोगों ने क्रिप्टो कॉइन्स या टोकन्स में निवेश (Crypto investment) करना शुरू कर दिया है. क्रिप्टोकरेंसी को माइनिंग (Crypto Mining) के जरिए जेनरेट किया जाता है. ये काम उत्कृष्ट कंप्यूटरों पर जटिल गणितीय समीकरण हल करके किया जाता है. समीकरण हल करने पर माइनर्स को इनाम में कॉइन्स मिलते हैं. डिसेंट्रलाइज्ड ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए क्रिप्टोकरेंसी की सुरक्षा तय की जाती है.

क्रिप्टोकरेंसी कैसे काम करती है और इसकी वैल्यू कैसे तय होती है?

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यह समझने के लिए हमें ये समझना होगा कि क्रिप्टोकरेंसी फ्लैट करेंसी यानी कि हमारी ट्रेडिशनल करेंसी (रुपया, डॉलर, यूरो वगैरह) से अलग कैसे होती है. सबसे बड़ा फर्क यह होता है कि क्रिप्टो को सरकार की ओर से कानूनी वैधता मिली हुई होती है. फ्लैट करेंसी की कीमत इस तथ्य से तय होती है कि दो पक्ष किसी लेन-देन के लिए उस कीमत में अपना विश्वास रख रहे हैं. अधिकतर देश इसी सिस्टम में काम करते हैं, जिसमें एक केंद्रीय बैंक और मौद्रिक संस्थान उस करेंसी के सप्लाई और इसके जरिए मुद्रास्फीति पर नियंत्रण रखते हैं.

लेकिन क्रिप्टोकरेंसी पर सरकार का नियंत्रण या नियमन नहीं होता है, ये डिसेंट्रलाइज्ड होते हैं, यानी किसी एक केंद्र के तहत काम नहीं करते हैं. अधिकतर देशों ने इसे कानूनी वैधता नहीं दी है. क्रिप्टो के साथ ऐसा भी है कि इनकी एक फिक्स्ड सप्लाई होती है, ऐसे में मुद्रास्फीति से कीमतें गिरने का डर नहीं रहता है.

इन तथ्यों के इतर दोनों में काफी कुछ एक जैसा है. दोनों को ही किसी वस्तु या सेवा को खरीदने के लिए लेने-देन में इस्तेमाल किया जाता है. और दोनों को ही उनके वैल्यू के लिए स्टोर करके रखा जाता है.

क्रिप्टोकरेंसी पब्लिक लेजर या सार्वजनिक बहीखाता (Cryptocurrency Public Ledger)

क्रिप्टोकरेंसी में हर ट्रेडिंग अपने आप एक डिसेंट्रलाइज्ड लेजर में दर्ज हो जाती है. इस लेजर पर किसी का अधिकार नहीं होता है, यानी इसका मेंटेनेंस या एक्सेस किसी एक व्यक्ति या संस्था के पास नहीं होता है. इसे कोई भी, कभी भी, कहीं से भी एक्सेस कर सकता है. सभी ट्रांजैक्शन क्रिप्टोग्राफी की मदद से सुरक्षित रहते हैं.

bitcoin afp

क्रिप्टोकरेंसी नोड काउंट (Cryptocurrency node count)

नोड काउंट यह बताता है कि किसी नेटवर्क पर कितने एक्टिव वॉलेट्स हैं. इससे समझ आता है कि किस क्रिप्टोकरेंसी की वैल्यू कम है, किसकी ज्यादा. अगर किसी निवेशक को यह पता लगाना है कि किसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमतें सही हैं या नहीं या फिर ओवरबॉट के चलते बढ़ गई हैं (ओवरबॉट मतलब किसी करेंसी को ज्यादा खरीदे जाने के चलते इसकी कीमतें बहुत बढ़ जाना) तो निवेशक को उसका नोड काउंट और कुल मार्केट कैप देखना होगा. इसके बाद इन दोनों की दूसरे क्रिप्टोकरेंसी से तुलना करनी होगी, इससे आपको उस क्रिप्टोकरेंसी की सही कीमत पता चल जाएगी. नोड काउंट से यह भी पता चलता है कि कोई क्रिप्टो कम्युनिटी कितनी मजबूत है. जिस कम्युनिटी के जितने ज्यादा नोड काउंट होंगे वो उतनी ज्यादा मजबूत होगी.

क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज

किसी क्रिप्टोकरेंसी की जानकारी लेने के लिए आप ऑनलाइन क्रिप्टो एक्सचेंज चेक कर सकते हैं. इसपर आपको किसी भी क्रिप्टो का मार्केट कैप, पिछले हफ्तों और महीनों में उसकी परफॉर्मेंस, सर्कुलेशन में उसकी कितनी करेंसी है, उसकी मौजूदा रेट क्या है और पहले रेट क्या था, वगैरह जैसी जानकारी एक्सचेंज पर मिलती है. इन एक्सचेंज पर बिटकॉइन, इथीरियम, टेदर और डॉजकॉइन जैसी कई दूसरी कॉइन्स को कुछ फीस चुकाकर ट्रेडिंग भी की जाती है.

किसी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत तय करना

किसी भी क्रिप्टोकरेंसी की कीमत तय करने का सबसे प्रभावी तरीका उसकी मांग को देखकर कीमत तय करना है. किसी क्रिप्टो में निवेशकों की ओर से बढ़ रही मांग के चलते उस कॉइन की कीमतें बढ़ जाती हैं. इसके उलट, अगर किसी कॉइन टोकन सप्लाई ज्यादा है, लेकिन उसकी डिमांड कम है, तो इसकी कीमतें गिर जाएंगी. इसके अलावा एक और चीज है, जिससे क्रिप्टोकरेंसी की कीमत तय होती है- वो है इसकी उपयोगिता. यानी कि वो करेंसी कितनी यूज़फुल यानी उपयोगी है. अगर किसी क्रिप्टोकरेंसी की माइनिंग प्रक्रिया ज्यादा कठिन है, तो इसका मतलब है कि उसकी सप्लाई बढ़ाना भी मुश्किल होगा, ऐसे में अगर डिमांड सप्लाई से ज्यादा हो गई तो उसकी कीमतें ज्यादा हो जाएंगी.

bitcoin

इसे अपनाए जाने को लेकर लोगों का रुख (Mass adoption)

अगर ज्यादा से ज्यादा लोग किसी क्रिप्टोकरेंसी में निवेश करेंगे तो उसकी कीमतें बेतहाशा बढ़ जाएंगी. लेकिन फिर भी आम जनता के बीच में इन्हें अपनाया जाना अभी बहुत दूर की बात दिखाई देती है क्योंकि इसमें कई वास्तविक पेचीदगियां हैं जो हमारे मौजूदा सिस्टम के हिसाब से परेशानी पैदा करेंगी.फ्लैट करेंसी का इस्तेमाल लेन-देन में जिस स्तर पर होता है, क्रिप्टो का वैसा इस्तेमाल नहीं हो सकता, या नहीं हो रहा है. इन कॉइन्स को मेनस्ट्रीम में लाने के लिए इनकी उपयोगिता बढ़नी जरूरी है, वहीं यह फैक्टर भी काम करेगा कि वो डील खरीददार को कितनी फायदे वाली लगती है.

कीमतों में उतार-चढ़ाव

क्रिप्टोकरेंसी बाजार अभी बहुत नया है और अधिकतर लोग इस इंडस्ट्री से बहुत परिचित नहीं हैं. ऐसे नए बाजारों में ऐसा होता है कि इसमें बहुत उतार-चढ़ाव देखा जाता है. लेकिन क्रिप्टो बाजार में काफी उतार-चढ़ाव रहने का यह कारण भी होता है कि ऐसे बहुत से व्हेल अकाउंट होते हैं, जिनके पास बड़ी संख्या में क्रिप्टोकरेंसी कॉइन्स होती हैं, और वो प्रॉफिट बुकिंग के लिए बाजार को प्रभावित करते हैं.

अगला बिटकॉइन विभाजन – कब, क्या और कैसे? (The Next Bitcoin Halving – When, What, and How?)

रोचक तथ्य: 2008 में पहली बार ब्लॉकचेन के लाइव होने पर माइनिंग रिवॉर्ड 50 बिटकॉइन (BTC) था। 210,000 ब्लॉक जोड़े जाने तक भुगतान अपरिवर्तित रहा, जिसके बाद इसे आधा कर दिया गया (आधा बना दिया गया)। अगले 210, 000 ब्लॉक जोड़े जाने के बाद, प्रक्रिया दोहराई जाती है। इसे बिटकॉइन विभाजन के रूप में जाना जाता है ।

Bitcoin विभाजन हर चार साल में होने वाली सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में से एक है और बिटकॉइन इकोसिस्टम में शामिल सभी लोगों पर इसका प्रभाव पड़ता है। अब तक (2012, 2016 और 2020 में) तीन बिटकॉइन विभाजन हो चुका हैं, जिनमें से प्रत्येक की काफी चर्चा हुई। बिटकॉइन विभाजन समग्र सप्लाई को स्थिर रखने के लिए वर्चुअल करेंसी की प्रोग्रामिंग का एक हिस्सा है।

हालांकि, आइए इस बात पर ध्यान दें कि बिटकॉइन वास्तव में क्या है और यह कैसे काम करता है? इसके बारे में जानने के लिए, आपको सबसे पहले यह जानना होगा कि यह कैसे काम करता है। घबराएं मत; आप यहां बिटकॉइन के बारे में पढ़ सकते हैं।

Bitcoin विभाजन क्या है?

Bitcoin नेटवर्क हर दस मिनट में नए बिटकॉइन बनाता है। अस्तित्व में आने के पहले चार वर्षों तक हर 10 मिनट में जारी किए गए नए बिटकॉइन की संख्या 50 थी। यह संख्या हर चार साल में आधी हो जाती है। जब धन को आधा कर दिया जाता है, तो इसे “हाल्विंग” या “हल्वेनिंग” के तौर पर जाना जाता है।

2012 में हर 10 मिनट में जारी किए गए नए बिटकॉइन की संख्या 50 से गिरकर 2013 में 25 हो गई। यह 2016 में 25 से गिरकर 12.5 हो गई। इसके सबसे हाल में 11 मई 2020 को हुई हाल्विंग में रिवॉर्ड को 2016 में 12.5 से घटाकर 6.25 प्रति ब्लॉक कर दिया गया था।

2024 की हाल्विंग के बाद रिवॉर्ड को 6.25 BTC से घटाकर 3.125 BTC कर दिया जाएगा।

अगले BTC विभाजन में क्या हो सकता है?

अधिकांश निवेशकों का मानना है कि Bitcoin का मूल्य अभी और 2024 में इसके चौथे विभाजन के बीच तेजी से बढ़ेगा। यह इसके ऐतिहासिक प्रदर्शन और पहले 3 विभाजन के परिणामों पर आधारित है। इन दोनों ही मौकों पर Bitcoin की कीमत ने आसमान छूआ है।

2012 में शुरुआती विभाजन के एक साल के भीतर, बिटकॉइन की कीमत $12 से बढ़कर $1,150 से अधिक हो गई थी। 2016 में, दूसरे विभाजन में बिटकॉइन की कीमत $20,000 से अधिक हो गई और फिर गिरकर $3,200 हो गई। और 2020 में, बिटकॉइन की कीमत $8,787 से बढ़कर $54,276 हो गई, जो लगभग 517% की वृद्धि दर्शाती है।

यह ध्यान में रखते हुए कि हर 10 मिनट में नए Bitcoin की माइनिंग होती है, अगले विभाजन की संभावना 2024 की शुरुआत में होने की है, एक माइनर का भुगतान 3.125 BTC तक कम हो जाएगा। बिटकॉइन के निवेशकों और व्यापारियों को इस बात की जानकारी होनी चाहिए कि हाल्विंग-अक्सर कॉइन/टोकन के लिए महत्वपूर्ण अस्थिरता और अशांति का परिणाम होता है।

तथ्य यह है कि कोई भी सटीक रूप से भविष्यवाणी नहीं कर सकता है कि रुकने के बाद क्या होगा और आने वाले हफ्तों और महीनों में, भले ही पारंपरिक रूप से विभाजन की घटनाओं के परिणामस्वरूप काफी मूल्य परिवर्तन हुए हों।

Bitcoin की कीमतों पर विभाजन का प्रभाव

Bitcoin की कीमत 2009 में अपनी शुरुआत से अप्रैल 2021 तक धीरे-धीरे काफी बढ़ गई, जब इसका ट्रेड सेंट या डॉलर में होता था, जब एक बिटकॉइन की कीमत $ 63,000 से अधिक थी। इसमें जबरदस्त वृद्धि हुई है।
क्योंकि ब्लॉक रिवॉर्ड को आधा करने से माइनर (या बिटकॉइन उत्पादकों) की लागत प्रभावी रूप से दोगुनी हो जाती है, इसलिए मूल्य निर्धारण पर भी इसका लाभकारी प्रभाव होना आवश्यक है, क्योंकि माइनरों को व्यय होता है, और इसे कवर करने के लिए; वे अपने विक्रय मूल्य में वृद्धि करते हैं।
एम्पिरिकल रिसर्च के अनुसार, वास्तविक तौर पर होने से कई महीने पहले, बिटकॉइन की कीमतें विभाजन की संभावना में ऊपर चढ़ जाती हैं।

मुख्य बात

बिटकॉइन विभाजन आमतौर पर क्रिप्टोकरेंसी के नेटवर्क में मूल्य मुद्रास्फीति का कारण बनता है और उस गति को कम कर देता है जिस पर नए बिटकॉइन प्रसार में आधे से जारी होते हैं। रिवॉर्ड स्कीम 2140 तक चलने का इरादा है, जब बिटकॉइन को 21 मिलियन की निर्दिष्ट सीमा हासिल हो जाती है। उसके बाद, माइनरों को शुल्क के साथ ट्रांजैक्शन को संसाधित करने के लिए मुआवजा दिया जाएगा। जबकि कीमत में उतार-चढ़ाव की उम्मीद है, कुछ व्यक्तिगत माइनर और छोटी कंपनियां भी माइनिंग परिवेश से बाहर हो सकती हैं या बड़ी संस्थाओं द्वारा कब्जा किया जा सकता है, जिसके परिणामस्वरूप माइनरों के लिए रैंकिंग की एकाग्रता होती है। तो बिटकॉइन की कीमत की गणना कैसे की जाती है? चलिए इंतजार करते हैं और देखते हैं कि आगे क्या होता है।

अस्वीकरण: क्रिप्टोकुरेंसी कानूनी निविदा नहीं है और वर्तमान में अनियमित है। कृपया सुनिश्चित करें कि आप क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार करते समय पर्याप्त जोखिम मूल्यांकन करते हैं क्योंकि वे अक्सर उच्च मूल्य अस्थिरता के अधीन होते हैं। इस खंड में दी गई जानकारी किसी निवेश सलाह या वज़ीरएक्स की आधिकारिक स्थिति का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। वज़ीरएक्स अपने विवेकाधिकार में इस ब्लॉग पोस्ट को किसी भी समय और बिना किसी पूर्व सूचना के किसी भी कारण से संशोधित करने या बदलने का अधिकार सुरक्षित रखता है।

Bitcoin: आने वाले दिनों में करोड़पति बना सकता है सिर्फ 1 'सिक्का', जानें इसे खरीदने और बेचने का तरीका

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन ने तीन साल में पहली बार शनिवार को 31000 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। अनुमान है कि यह आभासी मुद्रा की कीमत साल 2030 तक एक करोड़ तक पहुंच सकती है। गौरतलब है.

Bitcoin: आने वाले दिनों में करोड़पति बना सकता है सिर्फ 1 'सिक्का', जानें इसे खरीदने और बेचने का तरीका

दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बिटक्वाइन ने तीन साल में पहली बार शनिवार को 31000 डॉलर का आंकड़ा पार कर लिया। अनुमान है कि यह आभासी मुद्रा की कीमत साल 2030 तक एक करोड़ तक पहुंच सकती है। गौरतलब है कि अकेले दिसंबर में इसने 50 फीसद की वृद्धि दर्ज की थी। क्रिप्टोकरेंसी भुगतान पर पूर्ण प्रतिबंध हटाने के आरबीआई के आदेश के बाद बड़ी संख्या में भारतीय निवेशकों ने क्रिप्टोकरेंसी की तरफ रुख किया है। जैसे-जैसे इस दिशा में लोग बढ़ रहे हैं उतना ही जरूरी हो चला है कि बिटक्वाइन में निवेश से जुड़ी बातों से लोगों को अवगत कराया जाए।

इसे खरीदा-बेचा कैसे जाता है

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आप Bitcoin को क्रिप्टो एक्सचेंज से या सीधे किसी व्यक्ति से ऑनलाइन (पियर-टू-पियर) खरीद सकते हैं। दूसरे वाला माध्यम खासा जोखिम भरा है और इसे धोखेबाज भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ध्यान देने वाली बात यह है कि इसके एक्सचेंज भी किसी तरह के नियमन से नियंत्रित नहीं होते, लेकिन भारत में इन्हें दीवानी और आपराधिक कानूनों के दायरे में रखा गया है, जैसे कांट्रैक्ट एक्ट, 1872 तथा भारतीय दंड संहिता, 1860। इनमें निवेश करने से पहले जांच लें कि एक्सचेंज का पंजीकृत पता कहां है और वह भारतीय कानून के अधीन निगमित है या नहीं। कुछ एक्सचेंज केवाईसी और एंटी मनीलॉड्रिंग प्रक्रियाओं का भी पालन करवाते हैं।

क्रिप्टो की दुनिया में बिटक्वाइन का सफर

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करीब 350 अरब डॉलर के बाजार पूंजीकरण के साथ बिटक्वाइन दुनिया की सबसे बड़ी क्रिप्टोकरेंसी बन चुकी है। इसे 2009 में उस समय लांच किया गया था जब दुनिया में आर्थिक संकट आ चुका था। गणितीय गणनाओं के हल के आधार पर कंप्यूटरों ने बिटक्वाइन के अतिरिक्त यूनिट्स को तैयार किया। यह गणना हर बार यूनिट के जोड़े जाने के बाद और भी जटिल होती जाती है। इस आभासी मुद्रा की सबसे रोचक बात यह है कि इसका हिसाब-किताब हजारों कंप्यूटरों में एक साथ सार्वजनिक लेजर में रखा जाता है। यह ठीक उस प्रक्रिया के उलट है, जिसमें पारम्परिक मुद्राओं का हिसाब बैंकों के सर्वर में रखा जाता है।

बिटक्वाइन में मुनाफा कैसे बांटा जाता है

bitcoin dipped 7 as of 8 01 a m in london to about 17 555 while ether was more than 10 lower at

प्रारंभिक रूप से बिटक्वाइन को टेक प्रोफेशनल्स या फ्रीलांसर द्वारा प्रयोग में लाया जाता था, जिसमें उन्हें शुरुआती वर्षों में छोटे-छोटे भुगतान किए जाते थे। वर्ष 2017 तक आते-आते यह उस वक्त एक निवेश उत्पाद में तब्दील हो गया, जब इसका दाम 20 गुना बढ़ गया और दिसंबर 2017 में इसने 20000 डॉलर (12.6 लाख का भाव) हासिल कर लिया। 2018 में इसमें जबरदस्त गिरावट आई और यह गिरकर 2.3 लाख रुपये प्रति यूनिट तक आ गया। मार्च 2020 में कोविड की दस्तक के बाद इसने फिर तेजी की राह पकड़ी। अब यह पिछला शीर्ष स्तर पीछे छोड़ 13.97 लाख रुपये प्रति यूनिट तक पहुंच चुका है।

क्या भारत में क्रिप्टोकरेंसी का व्यापार कानून-सम्मत है

भारत में क्रिप्टोकरेंसी में निवेश न तो पूरी तरह से कानूनी है और न ही इस पर किसी तरह का प्रतिबंध है। वर्ष 2018 में आरबीआई के लगाए प्रतिबंध को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था। मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया था कि 2019 में सभी क्रिप्टोकरेंसी को रोकने वाला बिल संसद में लाया जाएगा, लेकिन इसे संसद के पटल पर कभी रखा ही नहीं गया। वकीलों का कहना था कि इस बिल का पास होना काफी मुश्किल होगा।

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इससे जुड़े जोखिम क्या हैं

शेयर बाजार में किसी शेयर के दाम उस कंपनी की लाभ की स्थिति या किसी बांड की मुनाफे की हालत को देखकर तय होते हैं, लेकिन बिटक्वाइन में ऐसा कतई नहीं है। इसकी कीमत तय करने का कोई आधार ही नहीं है। इसकी वकालत करने वाले लोग यह दावा करते हैं कि सोने जैसे अन्य निवेश संसाधनों में भी किसी तरह की वैल्यू उनके दाम से जुड़ी नहीं होती। बिटक्वाइन के दाम में होने वाला जबरदस्त उतार-चढ़ाव काफी तनाव देने वाला हो सकता है।

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