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मार्केटप्लेस

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ई-मार्केटप्लेस से 2,000 करोड़ की खरीदारी करेगा बिहार

बिहार सरकार ने चालू वित्त वर्ष में गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस पोर्टल (जेम) के जरिये 2,000 करोड़ रुपये की खरीदारी का लक्ष्य रखा है। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले करीब 5 गुना ज्यादा होगा। वित्त विभाग के मुताबिक इसके जरिये सरकार को मोटी बचत होगी। सरकारी खरीद को नियमित और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार ने जेम पोर्टल की शुरुआत की है। यह सरकारी विभागों के लिए एमेजॉन या फ्लिपकार्ट की तरह ई-रिटेलर की तरह काम करता है। राज्य के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बताया कि इस पर पूरे देश से विक्रेताओं ने निबंधन कराया है। मोदी ने कहा, 'इस पर विके्रताओं के लिए छूट का भी प्रावधान मार्केटप्लेस है। यही वजह है कि एक ही उत्पाद के लिए कई दाम मिल जाते हैं। इससे सरकारी विभागों को मोटी बचत होती है।'

राज्य सरकार के नियमों के मुताबिक सरकारी विभागों को 50,000 रुपये तक की खरीद सीधे जेम के जरिये करना है। उप-मुख्यमंत्री के मुताबिक इस पोर्टल पर 2,500 से ज्यादा निबंधित आपूर्तिकर्ता (2507) बिहार के हैं। साथ ही, राज्य सरकार के विभिन्न के विभिन्न विभागों के कुल 418 कार्यालयों के अधीन 694 यूजर्स जेम पर निबंधित हैं। मोदी के मार्केटप्लेस मुताबिक चालू वित्त वर्ष में राज्य सरकार ने इस पोर्टल के जरिये कम से कम 2,000 करोड़ रुपये की खरीदारी का भी फैसला लिया है। उन्होंने बताया, 'इस पोर्टल के जरिये सरकारी धन की काफी बचत होती है, इसीलिए हमने विभागों को इसी पोर्टल के जरिये खरीदारी करने का आदेश दिया है। चालू वित्त वर्ष में सरकार ने इस पोर्टल के जरिये 2,000 करोड़ रुपये की खरीद का लक्ष्य रखा है।'

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पेटीएम के उपाध्यक्ष अभिषेक राजन ने कहा, 'हम लगातार ऐसी स्टार्ट-अप का मूल्यांकन कर रहे हैं जिनकी मजबूत टीम है और जिन्होंने यात्रा क्षेत्र में अनोखे उत्पाद बनाए हैं, जो उपभोक्ताओं के अनुभव को बेहतर बनाते हैं। इससे हमें अपनी वर्तमान और भविष्य की जरूरतें पूरी करने में मदद मिलेगी।'

कंपनी अपने होटल बुकिंग कारोबार को भी बढ़ाने की कोशिश कर रही है। यह ग्राहकों और विक्रेताओं को ध्यान में रखते हुए अपने प्लेटफॉर्म के लिए एक उत्पाद बना रही है। कंपनी ने होटलों और एग्रीगेटरों के साथ साझेदारी के जरिये पेटीएम पर बुकिंग के लिए उपलब्ध होटलों की तादाद तेजी से बढ़ाने की योजना बनाई है। विजय शेखर शर्मा की अगुआई वाली इस कंपनी ने कहा कि पेटीएम का बस टिकट कारोबार हाल में ब्रेक ईवन (न लाभ न हानि) पर आ गया है। कंपनी ने कहा, 'होटल श्रेणी के भी जल्द ब्रेक-ईवन पर आने के आसार हैं और मई में शुरू की गई होटल बुकिंग श्रेणी माह दर माह आधार पर चार गुना मार्केटप्लेस वृद्धि दर्ज कर रही है।' इस समय कंपनी के यात्रा कारोबार से 100 कर्मचारी जुड़े हैं। कंपनी अगली दो तिमाहियों में कर्मचारियों की संख्या 150 करने के लिए इंजीनियरिंग, उत्पाद और डिजाइन के विस्तार की मार्केटप्लेस योजना बना रही है। पेटीएम के यात्रा मार्केटप्लेस पर विक्रेता ग्राहकों को विभिन्न यात्रा सेवाएं मुहैया कराते हैं। इससे ग्राहक प्लेटफॉर्म पर प्रतिस्पर्धी दरों पर सेवाएं चुन सकते हैं। पेटीएम यात्रा सेवा प्रदाताओं को अपने 13 करोड़ के यूजरबेस तक पहुंचने का मौका मुहैया कराती है। कंपनी ने हवाई टिकटों के लिए इंडिगो के साथ करार किया है।

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस ने जीता प्रतिष्ठित सिप्स पुरस्कार

गवर्नमेंट ई-मार्केटप्लेस (जीईएम) सीआईपीएस एक्सेलेंस इन प्रोक्योरमेंट अवार्ड्स 2021 में डिजिटल टेक्नोलॉजी के सर्वश्रेष्ठ उपयोग वर्ग में विजेता घोषित की गई। जीईएम जीईपी, जगुआर लैंड रोवर, रॉयल डच शेल, वेंडिडिजिटल तथा शेल सहित सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की वैश्विक रूप से कुछ सबसे बड़ी तथा सर्वश्रेष्ठ नामों वाली प्रोक्योरमेंट कंपनियों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के बाद जीईएम इस वर्ग में विजेता बन कर उभरी।

जीईएम का चयन दो अन्य वर्गों अर्थात वर्ष की सार्वजनिक प्रोक्योरमेंट परियोजना तथा एक विविध आपूर्ति आधार का निर्माण करने के लिए सर्वश्रेष्ठ पहल में भी फाइनलिस्ट के रूप में किया गया। जीईएम की तरफ से यह पुरस्कार कल लंदन में आयोजित एक समारोह में ब्रिटेन में भारत के उच्चायोग के प्रथम सचिव (इकोनोमिक) श्री रोहित वधवाना द्वारा ग्रहण किया गया।

सिप्स पुरस्कार वैश्विक रूप से प्रोक्योरमेंट से संबंधित सबसे अग्रणी सम्मानों में से एक है जिसका आयोजन लंदन के चार्टर्ड इंस्टीच्यूट ऑॅफ प्रोक्योरमेंट एंड सप्लाई (सिप्स) के तत्वाधान में किया जाता है। सिप्स 150 देशों में एक समुदाय के साथ प्रोक्योरमेंट तथा आपूर्ति प्रबंधन में अच्छे प्रचलनों को बढ़ावा देने के लिए समर्पित एक वैश्विक गैर-लाभकारी संगठन तथा पेशेवर निकाय है।

आदिवासी विक्रेताओं के लिए ई-मार्केटप्लेस

नई दिल्ली, मंगलवार, 30 जून 2020 (मैटर्स इंडिया) – ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक प्रवीर कृष्ण ने कहा, "हम 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के दिन वेबसाईट – ट्राईबल इंडिया ई-मार्ट चालू करेंगे। यह अपने उत्पादों को ई-कॉमर्स विशाल अमेजन या फ्लिपकार्ट पर अपने उत्पादों को बेचने के समान मार्केटप्लेस ही होगा। पृथकता सिर्फ इस बात में होगी कि यह केवल आदिवासियों के लिए है।" ई-मार्केटप्लेस का पूर्व परीक्षण 30 जुलाई से 14 अगस्त तक जारी रहेगा।

सरकार ने भारत के जनजातीय सहकारी विपणन विकास महासंघ (TRIFED) की स्थापना सन् 1987 में इस उद्देश्य से की थी ताकि देशभर के आदिवासियों के उत्पादों का उचित मूल्य मिल सके। एजेंसी केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्रालय के तहत कार्य करती है।

कृष्णा ने कहा कि आदिवासी मार्केटप्लेस शिल्पकारों को प्रशिक्षित किया जाएगा तथा उन्हें अपने आप को वेबसाईट में विक्रेता के रूप में रजिस्टर करने के लिए कहा जाएगा।

उन्होंने कहा कि हमारे स्टार्फ देशभर के 15 प्रांतों और राज्य के सरकारी अधिकारी, ट्राईफेड के साथ कार्य कर रहे हैं जो आदिवासियों को प्रशिक्षित करेंगे एवं उन्हें पंजीकरण करने में मदद देंगे।

उनका उद्देश्य है करीब 5 लाख आदिवासी कारीगरों को ऑनलाईन करना अर्थात् उन्हें बृहद राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ना।

वस्त्र, पेंटिंग, घर की सजावट के सामान, गहने और धातु शिल्प सहित 20,000 श्रेणियों में लगभग 5 लाख आदिवासी आइटम वेबसाइट पर उपलब्ध होंगे।

आदिवासी विक्रेताओं के उत्पाद एक सख्त गुणवत्ता जांच से गुजरेंगे और एक समिति प्रत्येक वस्तु के लिए कीमतें तय करेगी।

स्थानीय संग्रह केंद्र स्थापित किये जायेंगे जहाँ से उत्पाद देश के विभिन्न भागों में भेजे जायेंगे।

कृष्णा ने कहा कि हर 100 रूपये पर आदिवासी विक्रेता को 70 रूपया मिलेगा। वे करीब 5,000 आदिवासी कारीगरों के साथ 30 जुलाई को शुरू करेंगे और उनका लक्ष्य है 5 लाख आदिवासी कारीगरों के लिए प्लैटफॉर्म बनाना तथा उन्हें बृहद बाजार उपलब्ध कराना।

उन्होंने कहा कि "यह योजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन आत्म निर्भर भारत के तहत जारी किया जा रहा है। इसका आदर्शवाक्य है, "स्थानीय लोगों के लिए आवाज, आदिवासी बढ़ें।"

कृष्णा ने कहा कि एक कमीज की कीमत वे स्थानीय बाजारों में 200 रुपये में बेचते हैं, जिसकी कीमत दिल्ली में 1,000 रुपये है। उन्होंने कहा कि सर्वश्रेष्ठ गुणवत्ता वाले जैविक उत्पाद खरीदारों को वितरित किए जाएंगे, जिनके पास 15 दिनों के भीतर वस्तु वापस करने का विकल्प होगा यदि वे इससे संतुष्ट नहीं होंगे।

27 जून को केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री अर्जुन मुंडा ने सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर आदिवासी उत्पादों को लॉन्च किया।

कृष्णा ने बताया कि यह सरकारी विभागों और अधिकारियों को वेबसाइट से सीधे जनजातीय उत्पाद खरीदने में मदद करेगा।

मुण्डा ने कहा कि यह अधिक से अधिक लोगों को अपनी विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा करने हेतु ऑनलाइन होने के साथ - व्यापार के संचालन, खरीदारी और संचार के लिए, एक महत्वपूर्ण रणनीतिक बढ़ावा देने हेतु अपने गांव-आधारित आदिवासी उत्पादकों को लिंक करने के लिए एक सर्वव्यापी डिजिटलीकरण ड्राइव को अपनाना है।

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