शीर्ष युक्तियाँ

बाजार अर्थव्यवस्था क्या है

बाजार अर्थव्यवस्था क्या है

एफपीआई ने नवंबर में भारतीय शेयर बाजार में 31,630 करोड़ रुपये डाले

ब्याज दरों में आक्रामक वृद्धि का चक्र समाप्त होने की संभावना, मुद्रास्फीति में नरमी, अमेरिका के उम्मीद से बेहतर वृहद आर्थिक आंकड़ों तथा भारतीय अर्थव्यवस्था की जुझारू क्षमता की वजह से एफपीआई भारतीय शेयरों में पैसा लगा रहे हैं।

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, एक से 25 नवंबर के दौरान एफपीआई ने शेयरों में शुद्ध रूप से 31,630 करोड़ रुपये का निवेश किया है। इससे पहले अक्टूबर में उन्होंने आठ करोड़ रुपये तथा सितंबर में 7,624 करोड़ रुपये की निकासी की थी।

अगस्त में एफपीआई 51,200 करोड़ रुपये के शुद्ध लिवाल रहे थे। वहीं जुलाई में उन्होंने 5,000 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे। इससे पहले अक्टूबर, 2021 से एफपीआई लगातार नौ माह तक बिकवाल रहे थे।

कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान ने कहा कि भू-राजनीतिक चिंताओं की वजह से निकट भविष्य में एफपीआई का रुख उतार-चढ़ाव वाला रहेगा।

इस साल अभी तक एफपीआई ने शेयरों से 1.37 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं।

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि नवंबर में एफपीआई का प्रवाह बढ़ने की वजह शेयर बाजारों में तेजी, भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिरता है।

समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने ऋण या बॉन्ड बाजार से 2,300 करोड़ रुपये की निकासी की है।

भारत के अलावा इस महीने फिलिपीन, दक्षिण कोरिया, ताइवान और थाइलैंड के बाजारों में भी एफपीआई का प्रवाह सकारात्मक रहा है।

भाषा अजय अजय पाण्डेय

(इस खबर को IBC24 टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

ONGC गैस की कीमत पांच साल के लिए 6.5 डॉलर, रिलायंस-बीपी के लिए मूल्य में बाजार अर्थव्यवस्था क्या है बदलाव नहीं

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को चार डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (प्रति इकाई) के न्यूनतम मूल्य और 8.57 डॉलर की मौजूदा दर के मुकाबले अब अधिकतम 6.5 डॉलर का भुगतान किया जाएगा.

Published: November 29, 2022 4:04 PM IST

ONGC Gas Price

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों द्वारा पुराने क्षेत्रों से निकलने वाली प्राकृतिक गैस पर पांच साल के लिए मूल्य सीमा लागू की जा सकती है. सरकार द्वारा किरीट पारेख की अगुवाई में नियुक्त गैस मूल्य समीक्षा समिति ने इसकी सिफारिश की है. सीएनजी और पाइपलाइन से बाजार अर्थव्यवस्था क्या है आने वाली रसोई गैस पीएनजी की कीमतों में नरमी लाने के लिए ऐसा किया जाएगा.

Also Read:

सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी ऑयल एंड नैचुरल गैस कॉरपोरेशन (ONGC) और ऑयल इंडिया लिमिटेड (OIL) को चार डॉलर प्रति 10 लाख ब्रिटिश थर्मल यूनिट (प्रति इकाई) के न्यूनतम मूल्य और 8.57 डॉलर की मौजूदा दर के मुकाबले अब अधिकतम 6.5 डॉलर का भुगतान किया जाएगा. मामले से जुड़े तीन सूत्रों ने यह जानकारी दी.

हालांकि, मुश्किल क्षेत्रों से निकलने वाली गैस के लिए मूल्य निर्धारण फॉर्मूले को नहीं बदला जाएगा. मूल्य निर्धारण की यह व्यवस्था रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के केजी-डी6 क्षेत्र और ब्रिटेन की इसकी भागीदार बीपी पीएलसी के मुश्किल क्षेत्रों पर लागू होती है.

पारेख समिति को ‘‘भारत में गैस-आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए बाजार-उन्मुख, पारदर्शी और भरोसेमंद मूल्य निर्धारण व्यवस्था’’ सुनिश्चित करने के लिए सुझाव देने का काम सौंपा गया था. समिति को यह भी तय करना था कि अंतिम उपभोक्ता को उचित मूल्य पर गैस मिले.

उन्होंने कहा कि न्यूनतम और नियंत्रित मूल्य पांच साल के लिए होगा और इसकी हर साल समीक्षा की जाएगी.

इससे यह सुनिश्चित होगा कि कीमतें उत्पादन लागत से नीचे नहीं गिरेंगी, जैसा कि पिछले साल हुआ था. या मौजूदा दरों की तरह रिकॉर्ड ऊंचाई तक भी नहीं बढ़ेंगी.

सूत्रों ने कहा कि समिति की सिफारिशों के आधार पर खोज और उत्पादन (ईएंडपी) में निवेश की चिंताओं को भी दूर किया जा सकता है. उन्होंने कहा कि बाजार आधारित मूल्य निर्धारण से नए निवेश को प्रोत्साहन मिलेगा और वैश्विक कंपनियां यहां आएंगी.

सूत्रों ने कहा कि गैस के आवंटन में शहरी गैस को सर्वोच्च प्राथमिकता बाजार अर्थव्यवस्था क्या है मिलेगी. यह क्षेत्र ‘शून्य कटौती’ श्रेणी में होगा, जिसका अर्थ है कि उत्पादन में गिरावट के मामले में पहले अन्य उपभोक्ताओं की आपूर्ति में कटौती की जाएगी.

योजना आयोग के पूर्व सदस्य किरीट एस पारेख की अध्यक्षता वाली समिति अपनी रिपोर्ट को अंतिम रूप दे रही है और इसे अगले कुछ दिनों में सरकार को सौंप दिया जाएगा.

पेट्रोलियम मंत्रालय इन सिफारिशों की समीक्षा के बाद इसे मंत्रिमंडल की मंजूरी के लिए भेजेगा.

ब्रेकिंग न्यूज और लाइव न्यूज अपडेट के लिए हमें फेसबुक पर लाइक करें या ट्विटर पर फॉलो करें. India.Com पर विस्तार से पढ़ें व्यापार की और अन्य ताजा-तरीन खबरें

अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों पर रखें नजर- शोमेश कुमार

अर्थव्यवस्था से जुड़े सेक्टरों में मेरी धारणा मजबूत हो रही है। इनफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर में स्थिति अच्छी नजर आ रही है। एक बात समझनी जरूरी है, बाजार में काफी तेजी है और मुनाफावसूली शुरू हुयी तो हर सेक्टर इसमें शामिल होगा।

सिर्फ बैंक, वित्तीय सेवाएँ और बीमा ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें अभी कुछ करने की स्थिति नहीं है। अभी के लिये इनसे दूर रहना ही सही होगा। मुनाफावसूली के बाद टॉप 5 सरकारी और निजी बैंक के स्टॉक अच्छे स्तरों पर मिलें तो खरीद सकते हैं। शेयर बाजार के मोटा मुनाफा दिलाने वाले सेक्टरों के बारे में आप भी जानना चाहते हैं तो देखें यह वीडियो। बाजार विश्लेषक शोमेश कुमार से बातचीत कर रहे हैं बाजार अर्थव्यवस्था क्या है निवेश मंथन के संपादक राजीव रंजन झा।

#stockstobuynow #multibaggerstocks #stockstobuyindips #sharemarketnews #beststockstobuynow #stockstobuynow #beststocksforbeginners बाजार अर्थव्यवस्था क्या है #longtermstocks2022 #multibaggerstocksforlongterminvestment #bestsharetobuytoday #shomeshkumar

विदेशी निवेशकों को लुभाने लगा भारतीय शेयर बाजार, नंवबर में अब तक 31,630 करोड़ का किया निवेश

शेयर बाजार में तेजी और डिजिटल क्रांति का असर, भारत में अमीरों की संख्या 2021 में और बढ़ी

LagatarDesk : भारतीय शेयर बाजार पर विदेशी निवेशकों का भरोसा बढ़ता नजर आ है. फॉरेन इन्वेस्टर्स एक बार फिर से शेयर बाजार में वापसी कर रहे हैं. डिपॉजिटरी के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) ने नवंबर में अब तक भारतीय शेयर बाजार अर्थव्यवस्था क्या है बाजार में 31,630 करोड़ निवेश किये हैं. 1-25 नवंबर के दौरान एफपीआई ने शेयरों में शुद्ध रूप से 31,630 करोड़ इन्वेस्ट किया है. समीक्षाधीन अवधि में एफपीआई ने कर्ज या बॉन्ड बाजार से 2,300 करोड़ बाजार अर्थव्यवस्था क्या है रुपये की निकासी की है. (पढ़ें, भारत जोड़ो यात्रा में झामुमो की भागीदारी, मंत्री मिथिलेश ठाकुर सहित कांग्रेस के नेता इंदौर रवाना)

जनवरी से अबतक फॉरेन इन्वेस्टर्स ने निकाले 1.37 लाख करोड़

डिपॉजिटरी के आंकड़ों के बाजार अर्थव्यवस्था क्या है अनुसार, अक्टूबर में एफपीआई ने भारतीय शेयर बाजार से आठ करोड़ निकाले थे. जबकि सितंबर में 7,624 करोड़ और अगस्त में 51,200 करोड़ की बिकवाली की थी. हालांकि जुलाई में फॉरेन इन्वेस्टर्स ने बाजार से 5,000 करोड़ के शेयर खरीदे थे. इससे पहले अक्टूबर 2021 से एफपीआई लगातार नौ माह तक बिकवाली की थी. इस साल अभी तक एफपीआई ने बाजार अर्थव्यवस्था क्या है शेयरों से 1.37 लाख करोड़ निकाले हैं.

एफपीआई फ्लो बढ़ने से भारतीय बाजार में स्थिरता

मॉर्निंगस्टार इंडिया के एसोसिएट निदेशक-प्रबंधक शोध हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि नवंबर में एफपीआई का फ्लो बढ़ने की वजह शेयर बाजारों में तेजी, भारतीय अर्थव्यवस्था और रुपये की स्थिरता है. कोटक सिक्योरिटीज के इक्विटी शोध (खुदरा) प्रमुख श्रीकांत चौहान का कहना है कि भू-राजनीतिक चिंताओं की वजह से निकट भविष्य में एफपीआई का रुख उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है.

लगातार को पढ़ने और बेहतर अनुभव के लिए डाउनलोड करें एंड्रॉयड ऐप। ऐप डाउनलोड करने के लिए क्लिक करे

महंगाई दर में गिरावट के कारण भी निवेशकों ने दिखाया रूचि

वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के आंकड़े के अनुसार, थोक महंगाई दर अक्टूबर में घटकर 8.39 फीसदी हो गयी. जो सितंबर में 10.70 फीसदी पर थी. अक्टूबर में खुदरा महंगाई दर में भी गिरावट दर्ज की गयी. अक्टूबर के महीने में खुदरा महंगाई दर 6.77 फीसदी रही, जो सितंबर के महीने में 7.41 फीसदी रही थी. महंगाई दर घटने से भी निवेशकों का भरोसा भारतीय शेयर बाजार की तरफ बढ़ा है.

रेटिंग: 4.89
अधिकतम अंक: 5
न्यूनतम अंक: 1
मतदाताओं की संख्या: 611
उत्तर छोड़ दें

आपका ईमेल पता प्रकाशित नहीं किया जाएगा| अपेक्षित स्थानों को रेखांकित कर दिया गया है *