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आय के कई स्रोतों के प्रकार

आय के कई स्रोतों के प्रकार
इनकम फ्रॉम सैलेरी में आपको सैलरी के रूप में इनकम मिलती है. इसका विवरण फॉर्म 16 में दिया गया है. जिस कंपनी में आप काम करते हैं वह आपको हर साल फॉर्म 16 जारी करता है. कंपनियों को अपने कर्मचारियों को 15 जून तक फॉर्म 16 जारी करना होता है. इसमें पिछले वित्तीय वर्ष में आपके द्वारा प्राप्त वेतन, हर तिमाही में टीडीएस कटौती, कर छूट और कटौती का दावा शामिल है.

जानिए भारत में प्राइवेट ट्रस्ट की आय पर कैसे लगता है टैक्स

अगर आपका कोई स्पेशल चाइल्ड है, अगली पीढ़ी को बड़ा बिजनेस ट्रांसफर करना है या किसी बड़ी संपत्ति की रक्षा करनी है तो प्राइवेट ट्रस्ट एक प्रभावी एस्टेट प्लानिंग टूल साबित हो सकता है। यूं तो एक प्राइवेट ट्रस्ट का गठन कई मुद्दों को सुलझाता है। लेकिन टैक्स के मद्देनजर प्राइवेट ट्रस्ट बनाने के लिए बहुत कुछ चाहिए। अलग-अलग स्ट्रक्चर में ट्रस्ट पर विभिन्न टैक्स लगाए जाते हैं। इनकम टैक्स के रूप में ज्यादा पैसा न कटे इसलिए समझदारी से प्लानिंग करने की जरूरत होती है, ताकि फायदे मिलते रहें।

प्राइवेट ट्रस्ट के प्रकार: चूंकि सिर्फ लाभार्थियों को ही प्राइवेट ट्रस्ट की आय उपलब्ध है। इसलिए टैक्स उसी स्ट्रक्चर में लगाया जाता है, जिसमें इनकम मिली है। टैक्स के मद्देनजर दो स्ट्रक्चर एेसे हैं, जिनमें प्राइवेट ट्रस्ट की इनकम पर टैक्स लगाया जाता है।

रियल एस्टेट अपडेट के साथ बने रहें

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कर किसे कहते हैं कर कितने प्रकार के होते हैं? [What is tax, types of taxes in hindi]

सरकार द्वारा कई प्रकार के करों को लगाया जाता है। इनके वर्गीकरण को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता है:

1- प्रत्यक्ष कर: प्रत्यक्ष कर ऐसे कर हैं जो विधिगत रूप से जिस पर लगाए जाते हैं उसे ही इसका भुगतान करना पड़ता है। जैसे: आय कर।

2- परोक्ष कर: परोक्ष कर या अप्रत्यक्ष कर एक व्यक्ति पर आय के कई स्रोतों के प्रकार लगाए जाते हैं जबकि ये पूर्णत: या आंशिक रूप से दूसरे व्यक्ति द्वारा दिए जाते हैं। जैसे - बिक्री कर, सीमा शुल्क परोक्ष कर हैं क्योंकि इनका भार व्यापारी से उपभोक्ता को स्थानांतरिक होता है।

3- अनुपातिक कर: आनुपातिक कर में कर की मात्रा समान रहती है। सभी आयों पर एक दर से कर लगाया जाता है। इसका करदाता की आय से कोई आय के कई स्रोतों के प्रकार संबंध नहीं होता। इसे एक रेखाचित्र द्वारा दिखाया जा सकता है:

4- प्रगतिशील कर: प्रगतिशील कर में व्यक्ति की आय में परिवर्तन के साथ परिवर्तन होता है। आय की दर जितनी अधिक होती है। कर की दर भी उतनी ही अधिक होती है। भारत में प्रगतिशील कराधान को ही अपनाया गया है।

करों के प्रभाव (Effects of taxes)

कराधान के प्रभावों की व्याख्या निम्न प्रकार से की जा सकती है:

1- कराधान के उत्पादन पर प्रभाव: कराधान से कार्य करने, बचत करने तथा निवेश की क्षमता और कार्य करने, बचत करने तथा निवेष करने की इच्छा प्रभावित होती है। कर इन्हें कम करता है। परन्तु जब सरकार कराधान द्वारा एकत्रित धन खर्च करती है तो उससे देष के नागरिकों को सुविधाएं एवं सुगमताएं प्राप्त होती है। इसलिए कार्य करने, बचत करने और निवेष करने की योग्यता पर विचार करते समय सार्वजनिक व्यय के प्रभावों को भी ध्यान में रखा जाए।

2- कराधान के वितरण पर प्रभाव: आधुनिक कल्याणकारी सरकार का मुख्य उद्देश्य है आय और सम्पति की असमनताओं को कम करना। समान वितरण की प्राप्ति के लिए सार्वजनिक व्यय इस प्रकार किया जाये जिससे निर्धन लोगों की आय बढ़े। करारोपन का प्रबन्ध इस प्रकार किया जाये जिससे समृद्ध लोगों की आय और सम्पति में वृद्धि पर रोक लगे।

खुद भरना चाहते हैं ITR? तो पहले लगाएं टैक्सेबल इनकम का हिसाब, जानिए तरीका


नई दिल्ली: वित्त वर्ष 2021-22 के लिए आपको इसी महीने के अंतिम दिन मतलब 31 जुलाई तक आयकर रिटर्न दाखिल करना होगा. इसके बाद यदि आप रिटर्न दाखिल करेंगे तो जुर्माना भरना होगा. आप चाहें तो खुद भी रिटर्न कर सकते हैं या फिर किसी एक्सपर्ट की सलाह या मदद ले सकते हैं. रिटर्न फॉर्म में पहले से कई जानकारियां भरी होती हैं. लेकिन, इसके लिए आपको कुछ होमवर्क करना होगा. इनमें से सबसे पहले अपनी कर योग्य आय (Taxable Income) को जानना है.

आयकर रिटर्न भरने के लिए सबसे पहला कदम यही जानना है कि आपकी टैक्सेबल इनकम कितनी है. इसका मतलब आपकी आय का वह हिस्सा है, जिस पर आपको टैक्स चुकाना होता है. जो लोग नौकरीपेशा हैं, उनके लिए अपनी टैक्सेबल इनकम जानना आसान है.

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हाउस प्रॉपर्टी के हैं तीन पार्ट
हाउस प्रॉपर्टी से आय जानने के लिए नियम और शर्तें भी हैं. इसके लिए संपत्ति को तीन भागों में बांटा गया है. इनमें स्व-अधिकृत (Self-Ocupied) संपत्ति, किराये की संपत्ति और किराये पर दी गई समझी जाने वाली संपत्ति शामिल हैं. स्व-अधिकृत संपत्ति का अर्थ है एक संपत्ति (मकान), जिसका उपयोग आप अपने जीवन-यापन के लिए करते हैं. आयकर के नए नियमों के अनुसार दो संपत्तियों को स्व-अधिकृत माना जा सकता है. यदि आपके पास तीसरी संपत्ति है, चाहे आपने इसे किराए आय के कई स्रोतों के प्रकार पर दिया हो या नहीं, इसे डीम्ड आउट माना जाएगा. तब इससे होने वाली आय (किराया) आपकी आय मानी जाएगी.

पूंजीगत लाभ से आय के अंतर्गत एक विशेष प्रकार की आय होती है. इनमें संपत्ति, म्यूचुअल फंड्स, शेयरों की बिक्री से होने वाला लाभ शामिल है. यह दो प्रकार का होता है – शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन. संपत्ति खरीदने और बेचने के बाद का समय इस बात पर निर्भर करता है कि इससे होने वाला लाभ शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन होगा या लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन. विभिन्न संपत्तियों के लिए एक अलग कार्यकाल है.

अतिरिक्त आय आय के कई स्रोतों के प्रकार के साधन के रूप में लोकप्रिय हो रही है ट्रेडिंग, जानें अतिरिक्त आय पाने के 7 तरीके

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नई दिल्ली. हम सभी आरामदायक और शानदार लाइफ स्टाइल चाहते हैं. आज की दुनिया में, हमारे जीवन के लक्ष्यों और इच्छाओं को पूरा करने के लिए, इनकम का एकमात्र स्रोत होना अपर्याप्त है. आय का अतिरिक्त स्रोत होने से आपको अधिक वित्तीय सुरक्षा और स्थिरता पाने में मदद मिल सकती है. इसके अलावा, यह आपकी बढ़ती जरूरतों को पूरा करने और आरामदायक जीवन जीने में आपकी मदद कर सकता है.

फ्रीलांसरों के लिए आयकर फाइलिंग

वेतनभोगी कर्मचारियों और फ्रीलांसरों के लिए कर दाखिल करने के बीच व्यापक अंतर है, जिसके बारे में छोटी सी छोटी चीज़ों को समझना बहुत ही ज्यादा ज़रूरी है। दरअसल, वेतनभोगी कर्मचारी एक डिज़ाइन किए गए ढांचे में होते हैं, जहाँ उनके आयकर रिटर्न दाखिल करने और औपचारिकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न प्रशासनिक मदद होती है। इस लिहाज से वेतनभोगी कर्मचारियों को अपने आयकर दाख़िल करने की ज्यादा चिंता नहीं होती है, क्योंकि उन्हें सिर्फ टैक्स दाख़िल करना होता है और बाकी चीज़ों की मदद उन्हें उनके कंपनी से आसानी से मिल जाती है, लेकिन फ्रीलांसरों के लिए यह प्रक्रिया थोड़ी सी जटिल है।

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